शनिवार, 18 जून 2016

अखिलभारतीय संस्कृत पत्रकार संगोष्ठी

मान्यवर!
       पत्रकारिता जन शिक्षण का सशक्त माध्यम है। संस्कृत की एक विधा पत्रकारिता है। इसमें शिक्षा, मनोरंजन, राजनीति, अर्थनीति, रोजगार आदि विषयों का समावेश हो चुका है। आज संस्कृत पत्र-पत्रिकाओं में लेखन व प्रकाशन के विविध रूप उपलब्ध है। भारत में ही संस्कृत में शताधिकपत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही है।
       इस वर्ष हम संस्कृत पत्रकारिता का सार्धशती समारोह मना रहे है। उत्तर- प्रदेश- संस्कृत- संस्थान द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 19 एवं 20 जुलाई 2016 को अखिल भारतीय- संस्कृत पत्रकार संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। 
इस अवसर पर अधोलिखित निर्धारित विषयों में से किसी एक विषय पर संस्कृत/हिन्दी/अंग्रेजी में पांच पृष्ठों तक का शोधपत्र दिनांक 05 जुलाई 2016 तकआमंत्रित है। यूनीकोड में टंकित शोधपत्र ईमेल- upsanskritsansthanam@yahoo.com पर अथवा संस्थान के पते पर डाक द्वारा भेजा जा सकता है। दिनांक 10 जुलाई 2016 तक शोधपत्रों का चयन कर प्रतिभाग करने हेतु सूचना प्रेषित कर दी जाएगी। शोध पत्र वाचन का प्रमाण पत्र दिया जायेगा। संगोष्ठी के लिए कोई शुल्क अपेक्षित नहीं है।
                                                   मुख्यविषय-
                                      संस्कृतपत्रिकाया विविधा आयामाः।
                  उपविषय-
1- संस्कृतपत्रिकायाः परिचयः वैशिष्ट्यञ्च।
2- संस्कृतपत्रपत्रिकायाः सावधिकता।
     दैनिकी,साप्ताहिकी,मासिकी,द्वैमासिकी,त्रैमासिकी,षाण्मासिकी,वार्षिकी आदयः।
3- पत्रिकायाः प्रकाराः।
    मौखिकी, हस्तलिखिताः, मुद्रिताः, श्रव्यमाध्यमेन प्रसारिता, दृश्यमाध्यमेन प्रसारिता, ई-पत्रिका
4- संस्कृतपत्रकारितायां नूतनाः उन्मेषाः।
5- संस्कृतपत्रपत्रिकाषु प्रकाशिता सामग्री।
      सम्पादकीयम्, लेखाः, निबन्धाः, शोधपत्राणि, रचनाः, दृष्यश्रव्यम्, नभोनाट्यम्, विविधरूपकानि,               
       संस्कृतशिक्षणपरकस्तम्भः, सांस्कृतिकसामग्री, अनुवादः, नवप्रकाशनचर्चा, शोकवृत्तम, विज्ञापनानि, विविधाः सूचनाः    
       आदयः।
6- संस्कृतपत्रिकायां लोकरंजकतत्वानि।
7- संस्कृतपत्रिकायाः मानकभाषा।
8- संस्कृतपत्रकारितायाः साम्प्रतिकी स्थितिः भविष्यत् च।
9- सामाजिकसंचारमाध्यमेषु संस्कृतम्।
10- जनशिक्षणे संस्कृतपत्रिकायाः भूमिका।
11- पत्रिकायाः स्तरमुन्नेतुं सम्भूय किं करणीयम्।
                        कार्यक्रम विवरण-

  दिनांक        समय            सत्र विवरण             संगोष्ठी विषय
  19-7-16    पूर्वाह्ण  10.00-11.30    

                  पूर्वाह्ण   11.30-1.00         प्रथम सत्र           संस्कृतपत्रिकायाः परिचयः वैशिष्ट्यञ्च।

                 मध्यान्तर 1.00 -2.30 

                 अपराह्ण   2.30-4.00      द्वितीय सत्र        संस्कृतपत्रपत्रिकायाः सावधिकता।
                                                                                पत्रिकायाः प्रकाराः।
                 अपराह्ण 4.00-6.00    तृतीय सत्र              संस्कृतपत्रकारितायां नूतनाः उन्मेषाः।
                                            संस्कृतपत्रपत्रिकाषु प्रकाशिता सामग्री।


20.07.16   पूर्वाह्ण 10.00-11.30   चतुर्थ सत्र          संस्कृतपत्रिकायां लोकरंजकतत्वानि।
                                          संस्कृतपत्रिकायाः मानकभाषा।
                 पूर्वाह्ण   11.30-1.00   पंचम सत्र संस्कृतपत्रकारितायाः साम्प्रतिकी स्थितिः भविष्यत् च।
                 मध्यान्तर 1.00 -2.30
                 अपराह्ण 2.30-4.00   षष्ठ सत्र         सामाजिकसंचारमाध्यमेषु संस्कृतम्।
                                                                    जनशिक्षणे संस्कृतपत्रिकायाः भूमिका।
                 अपराह्ण 4.00-6.00  समापन सत्र     पत्रिकायाः स्तरमुन्नेतुं सम्भूय किं करणीयम्।

                           आमंत्रिताः पत्रकाराः


क्रम               नाम             स्थान     पत्रिका का नाम          सम्पर्क
1     डॉ.  सदानन्द दीक्षित   भद्रक         लोकभाषा सुश्रीः         9438298181
2     डॉ.बुद्धदेव शर्मा         देहरादून       वाक्                 9411111185                 
3     डॉ.बलदेवानन्द सागर    दिल्ली                             9810562277
4     डॉ.विपिन झा          हिमाचल प्रदेश  जाह्नवी              9459486822            
5     डॉ.रमाकान्त शुक्ल     दिल्ली अर्वाचीन  संस्कृतम्             9560532392 
6     डॉ.जीवन शर्मा        दिल्ली          संस्कृत वाणी          9818378284 
                                      संस्कृतरत्नाकरः
7     डॉ.प्रफुल्ल पुरोहित     अहमदाबाद     देवसायुज्यम्,                  9376217477
                                     संस्कृत वर्तमान पत्रम्
8     डॉ.चन्द्रगुप्त वर्णेकर    नागपुर        संस्कृत भवितव्यम्      9370 803913
9     डॉ.के. वि. सम्पत् कुमार मैसूर         सुधर्मा                9980027696   
10   डॉ.अय्यम्पुष हरिकुमारः  केरल         सम्प्रति वार्ताः          9400417084


संगोष्ठी में सहभागिता के लिए सम्पर्क करें-
सम्पर्क-        0522-2780251 (प्रातः 10 बजे से सांय 5.00 बजे तक कार्यदिवसों में)
WhatsApp-7271032846

(बृजेश चन्द्रः)
निदेशकः
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् 






गुरुवार, 16 जून 2016

संस्कृत की पत्रिकायें और हम

561, 2nd Ramachandra Agrahara, MYSORE-570 004 Karnataka से प्रकाशित होने वाली  सुधर्मा आज चर्चा में है। चर्चा इसलिए कि अब यह बंद होने की स्थिति में आ गयी। यह पहला मौका नहीं है कि इस दैनिक संस्कृत समाचार पत्र के बंद होने की खबर आयी हो। पहले भी अनेक बार इस प्रकार की खबर आती रही है। संस्कृत जगत् में सुधर्मा ही वह पत्रिका नहीं है, जिसके बंद होने का समाचार हमें दुखी किया हो। अनेक पत्रिका आर्थिक तथा अन्य कारणों से बंद हो चुकीं है। हम एक समय तक सिर्फ दुखी होते हैं, फिर भूल जाते हैं। पत्रिकाओं को इस प्रकार की स्थितियों से बचाने के लिए संगठित होकर कोई कार्ययोजना नहीं बनाते। असंगठित समूह का आवेग क्षणिक होता है और यह निर्णायक स्थिति तक पहुँचने में असमर्थ होता है। ये बंद होने के कारणों तथा कारकतत्वों से न तो अवगत होते हैं न हीं कराने में सक्षम होते हैं। सुधर्मा के सम्पादक श्री के.बी.सम्पत् कुमार ने संस्कृत पत्रकार संगोष्ठी के आमंत्रण पर चर्चा करते हुए मुझसे कहा कि मुझे पत्रिका में विज्ञापन की आवश्यकता है। यदि विज्ञापन मिलता रहे तो हमें इसे चलाने में मदद मिलेगी। संस्कृत के सेवा क्षेत्र से जुडे लोग जानते हैं कि उनकी संस्था वर्ष भर में कितने धनराशि का विज्ञापन देती हैं, उसमें संस्कृत समाचार पत्रों की हिस्सेदारी कितना प्रतिशत है। 
         किसी पत्र- पत्रिका के प्रकाशन में आर्थिक भूमिका के साथ -साथ उसका समय से प्रकाशन और वितरण भी का भी स्थान है। पर्याप्त मानव संसाधन के विना पत्रिका हेतु अच्छे लेख का संकलन, अक्षर संयोजन, चित्र संयोजन, मुद्रण और पाठकों से पत्रोत्तर कर ग्राहक संख्या बढाना संभव नहीं।        क्या हम किसी पत्रिका को खरीद कर सम्पादक का मनोबल बढाते हैं? क्या हम कुछ मित्रों के साथ मिलकर उनके लिए ग्राहक जुटा पाते हैं? क्या हम पत्रिका के लिए उपयोगी सुझाव देते हैं? हमारा एक छोटा सा प्रयास संस्कृत पत्रकारिता के लिए संजीवनी का काम करेगा। एक व्यक्ति अपने विवेक और उत्साह के साथ इस अलाभकारी कार्य में प्रवृत्त होता है। अपने सामर्थ्य के अनुसार संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रयत्नशील रहता है। जब वह थक जाये तब? जब वह अस्वस्थ रहने लगे तबयहाँ बस इतना ही कि जिनके सामर्थ्य में विज्ञापन देना है वे विज्ञापन दें। जो खरीद सकते हैं ग्राहक बनें। दो चार मित्रों को जोडकर संगठित कार्य करें। अनुभवी विद्वानों से प्रेरणा व ऊर्जा लें। संस्कृत के लिए काम करना अपनी आदत बना लें। मैंने अपने ब्लाग के इस लिंक पर http://sanskritbhasi.blogspot.in/2015/08/blog-post_20.html अनेक संस्कृत की पत्र पत्रिकाओं के नाम, पते,ईमेल,बेवसाइट,फोन नं. आवधिकता आदि का विवरण उपलब्ध कराया है। आप सम्पादक/प्रकाशक से सम्पर्क कर इसकी सदस्यता ले सकते हैं। सुधर्मा पत्रिका मंगवाने का विवरण इस प्रकार है-

Annual Subscription for Sudharma Sanskrit Daily Rs. 400/- p.a. (inclusive of postage)
For Online transfer:
State Bank of India
New Sayyaji Rao road branch
Name of account: Sudharma Samskrutha Daily
IFSC: sbin0003130
Account number: 32017153837
Pls. send D.D./M.O. only in favor of
Sudharma Sanskrit Daily
# 561, 2nd Ramachandra Agrahara
Mysore-570 004 Karnataka
Pls. send your detailed address and telephone no. for communication